पापों के शमन और आत्मा की शुद्धि का दिव्य तट
माना जाता है कि यहाँ गोमती नदी के इस पावन तट पर स्नान करने से सभी ज्ञात-अज्ञात पापों से मुक्ति मिलती है।
त्रेतायुग में स्वयं भगवान श्री राम ने रावण वध के पश्चात ब्रह्म-हत्या के दोष के निवारण हेतु यहाँ स्नान किया था।
नदी का शांत प्रवाह और चारों ओर का आध्यात्मिक परिवेश भक्ति और आत्मिक शांति का गहरा अनुभव कराता है।
एक ऐसा तट जहाँ इतिहास और धर्म का संगम होता है...
धोपाप कुंड उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में गोमती नदी के किनारे स्थित एक अत्यंत प्राचीन और सिद्ध स्थान है। 'धोपाप' का अर्थ ही है 'पाप धोना'। यहाँ की महिमा रामायण काल से प्रचलित है। हर वर्ष जेष्ठ माह की दशमी को यहाँ 'गंगा दशहरा' का मेला लगता है जहाँ लाखों भक्त डुबकी लगाते हैं।
यहाँ न केवल धार्मिक आस्था जुड़ी है, बल्कि इसका प्राकृतिक सौंदर्य भी अद्भुत है। नदी की धारा यहाँ विशेष रूप से पवित्र मानी जाती है जो भक्तों के मन को निर्मल कर देती है।
प्रातः 06:00 AM से संध्या 07:00 PM
त्योहारों और विशेष मुहुर्तों पर यहाँ का समय परिवर्तित हो सकता है।
निस्वार्थ सेवा और समर्पण के साथ हर श्रद्धालु का स्वागत।
सनातन संस्कृति और वैदिक ज्ञान का पवित्र संगम।
सरयू तट की पावन वायु और शांत आध्यात्मिक वातावरण।